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Buy 100% Original Desi Panchgavya Ghrit Nasyoashadi [Nose]

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पंचगव्य घृत नस्यौषधि शाब्दिक रूप में “पंचगव्य घृत” का संस्कृत में अर्थ है : पंच – पांच; गव्य – अवयव या इंग्रेडिएंट और घृत – घी पंचगव्य घृत एक परम्परागत आयुर्वेदिक दवा है जो गर्दन के ऊपरी भाग यानि, दिमाग, आँखें, कान, नाक, मुंह और गर्दन आदि के बीमारियों के लिए अत्यंत लाभकारी है। Ingredients – सामग्री 1  भाग गाय का घी 1 भाग गोमूत्र 2 भाग गाय के दूध का दही 3 भाग गाय का दूध 1/2 भाग गाय का गोबर Panchgavya Nasya Benefits in Hindi [Panchgavya Nasya ke Fayde] ☛ दिमाग, आँखें और हड्डी के मज़्ज़ा से सम्बंधित रोगों और Disorder को दूर करता है। ☛ शरीर में वात पित्त और कफ को संतुलित करता है। ☛ सर्दी-ज़ुकाम, माइग्रेन और साइनस से सम्बंधित रोगो को दूर करता है। ☛ अवसाद या डिप्रेशन, नींद कम आना आदि में काफी लाभकारी है। ☛ दिमाग को ठंडक देता है और मेमोरी को तेज़ करता है। ☛ नर्वस सिस्टम को मज़बूत बनता है। ☛ जिनको दिमागी रूप से कोई बीमारी या Disorder है वे निसंकोच इस घी का इस्तेमाल कर सकते हैं, और जो अवसाद या डिप्रेशन से पीड़ित हैं, उनके लिए यह रामबाण है और लम्बे समय तक उपयोग करने पर वे डिप्रेशन दूर करने वाली टेबलेट से भी छुटकारा पा सकते हैं। ☛ शरीर की कमज़ोरी, कमज़ोर इम्युनिटी और तनाव भरे दिमाग की अवस्था को स्वस्थ रखता है। ☛ सिरदर्द, मानसिक उन्माद, मिर्गी, अपस्मार, पागलपन, नेला, भगन्दर, पाण्डु, कामला, दमा, खांसी, बालग्रह, गले के रोग, मस्तिष्क के रोग व सिर के रोगों में उपयोगी। How To Use Panchgavya Nasya – उपयोग विधि [Kaise Upyog Karein] – Dosage गुनगुना करके 2-2 बूँद नाक में डालना है, नस्य डालने के बाद 10-15 मिनिट तक लेटे रहें। आयुर्वेदिक इतिहास महर्षि अग्निवेश ने चरक संहिता में मानसिक कमज़ोरी के बारे में 2 अध्याय में लिखा है, उन्माद और अपस्मार। उन्माद : मानसिक स्थिति जैसे, कमज़ोरी, दबाव और तनाव। अपस्मार : गुस्सा, अतिश्योक्ति या बढ़ा चढ़ा कर बोलना, अनियंत्रित भावनाएं और उत्तेजित मानसिक अवस्था। चरक संहिता ने इन 2 श्रेणियो के बारे में बात की है और मुख्य रूप से घी पर काफी ज़ोर दिया है और घी की चिकनाई का लाभ इस तरह की बीमारियों या Disorder में काफी फायदेमंद है। वैज्ञानिक रूप से हमारा शरीर और दिमाग blood brain barrier (BBB) के द्वारा अलग अलग है। शरीर के अन्य भागों की तरह दिमाग का दरवाज़ा नाक से होकर जाता है और BBB शरीर के अंदर के भागों को चिकनाईयुक्त रखता है और घी हमारे शरीर के अंदरूनी भागों को भी स्वस्थ रखता है। चरक संहिता में एक विशेष तरह के घी के बारे में बताया गया है जिसको पंचगव्य घी कहा जाता है जो दिमाग से सम्बंधित Disorder या बीमारियों में बहुत फायदा करता है। पंचगव्य घृत या पंचगव्य घी दूध, दही, गोमूत्र, गाय के गोबर और गाय के घी का मिश्रण है। यह घी उन लोगो के लिए अत्यंत लाभकारी है जो दिमागी रूप से बहुत दबाव महसूस करते हैं या दिमागी कमज़ोरी का अनुभव करते हैं या जिनका कार्य में मानसिक ध्यान कम रहता है। इस घी को 2 तरह से उपयोग किया जाता है, (1) नाक में डालने के लिए और (2) खाने के लिए।
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